Saturday, May 30, 2009

Mar khate INDIANS

Khud ko vishwa guru kahne wala indian jab bahar guru banne,padne jata hai to uss par hamle hote hai...kahi ye Apni cricket team ki haar ka badla lene ke liye to nahi kiya jaa raha. jo log aisa nahi sochte unko bata du ki hum bhi yahi karte hai ..kisi ka gussa kisi or pe utarte hai.RAM ka gussa SHYAM pe utarte hai...iss kala me hum mahir hai.
kam ki baat pe aate hai.ye maar peet ke kisse koi nai baat nahi hai..ek TV reality show ke liye gai indian actress kamar lachkau shilpa shetty ke sath bhi yahi hua tha.ab wo ghatna sachchi thi ya publicity stunt ye charcha ka vishya nahi hai.shilpa shetty ne wo tamasha jeet liya bus ye baat yahi khatm hoti hai..paisa sari dushmani bhoola dena ka madda rakhta hai.paisa ka gun gaan karne ke alawa mein yaha dusre desh mein hue bhartiyo pe hamle ke baare me apke andar soye hue chuhe ko jagane aaya hu.agar aapko bura laga ki mene apko chuha kaha to aap bura man sakte hai..kyon ki yaha sab swarthi hai.khud pe zulm ho to bura lagta hai.peer parai kon janta hai.

zara uss baap ke bare mein soche jo TV par apne bete ko hospital me lete hue dekhta hoga.agar aap wo dard mehsus karna chahte hai to,par sachche dil se to ek idea deta hu apni girlfriend ko kabhi fever me dekhna ya usse choot pahucha ke usse milna.usska dard to mehsus karoge na.kyonki aaj ke jawan ladke ko dekh ka dard feel ho na ho par girlfriend ka dard jarur feel hota hai..har teesra ladka aapko JAANU I CAN FEEL UR FEELINGS, kahta mil jayega.ungali ko vote dene ke use me lene se behtar wo apne anguthe (thumb)ko girlfriend ko sms karne me use me lena chahta hai.kher girlfriend ke baare me hum phir baat karenge.lekin yaha agar aapko apni baatein chatpati banani hai to ladkiyon ki baat karni hogi.agar aap chahte ho ki koi aapka likha hua lekh(artical)pade to ladki ki baat karni hogi.ajeeb problum hai iss dekh ki.

kya hum itne bhi kabil nahi hai ki apne bachcho ki dosto ki bhaiyon ki safety ke liye kuch kar sake.agar nahi kar sakte humare neta log to aao train me hinzado ke sath paise mangte hai.aao


lijiye ye artical likhte hue ek news or TV pe dekh ko mili ki cricketer HARBHAJAN SINGH KE BHATIJE ko dusre desh me maar ke railway track pe fenk dia. what the hell they are doing.? bah****** .
lekin hum BAPU k bete hai wo chahe kitne bhi zulm kare hum hans kar sahenge. blddy hell.kya humne chudiya pehan rakhi hai ya hum keval gar mein biwio ko marne ke liye paida hue hai.

utho nethao paise khane ke alawa bhi kuch rakha hai duniya hai.kursi ki ladai ke alawa bhi apne bhaio ko sambhalo jo lakho ummide leke bahar gaya hai.jo kisi ghar ka chirag hai.agar tum kisi MA ki aankho aansu dekh sakte ho to khud bhi rone ko tyar raho.

bina kisi result ke apni baat khatm karta hu.
कितना है दम चराग़ में, तब ही पता चले
फानूस की न आस हो , उस पर हवा चले

फानूस = काँच का कवर


लेता हैं इम्तिहान गर, तो सब्र दे मुझे
कब तक किसी के साथ, कोई रहनुमा चले


नफ़रत की आँधियाँ कभी, बदले की आग में
अब कौन लेके झंडा –ए- अमनो-वफ़ा चले


चलना अगर गुनाह है, अपने उसूल पर
सारी उमर सज़ाओं का ही सिल सिला चले


खंज़र लिए खड़े हो गर, हाथों में दोस्त ही
“श्रद्धा” बताओ तुम वहाँ, फ़िर क्या दुआ चले


वक़्त करता कुछ दगा या तुम दगा करते कभी
साथ चलते और तो हम भी बिछड़ जाते कभी

आजकल रिश्तों में क्या है , लेने देने के सिवा
खाली हाथों को यहाँ, दो हाथ न मिलते कभी

थक गये थे तुम जहाँ वो आख़िरी था इम्तिहाँ
दो कदम मंज़िल थी तेरी काश तुम चलते कभी

कुरबतें ज़ंज़ीर सी लगती उसे अब प्यार में
चाहतें रहती जवाँ, गर हिज़ृ में जलते कभी

कल सिसक के हिन्दी बोली ए मेरे बेटे कहो
क्यूँ शरम आती है तुमको, जो मुझे लिखते कभी

आजकल मिट्टी वतन की रोज कहती है मुझे
लौट आओ ए परिंदों, शाम के ढलते कभी

Friday, May 29, 2009


एक चादर में लिपटे दो बदन *
तेरी चांदनी में नहाऊं मैं और हर तरफ बस अंधेरा हो,


एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो


तेरे मखमली बदन में,खुशबुऒं के चमन में


सदियों तक वो रात चले,सदियों दूर सवेरा हो


एक चादर में लिपटे दो बदन , एक तेरा हो एक मेरा हो


तेरे होठों को सिल दूं मैं अपने होठों के धागे से


एक सन्नाटे में खामोशी से, तेरी बाहों ने मुझको घेरा हो


एक चादर में लिपटे दो बदन, क तेरा हो और एक मेरा हो


दोनों लिपटें एक दूजे से, गांठ सी लग जाए बदनों में


मेरे जिस्म में घर मिल जाए तुझे, तेरे जिस्म में मेरा बसेरा हो


एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो


आज मन कहता है कि कुछ ऐसा हो, तू बन जाए मैं , मैं बन जाऊं तू


बिस्तर पे तेरे मेरे सिवा,सिर्फ ज़ुनून और खामोशी का डेरा हो


एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो

तुमसे दो बातें करने को मेरा दिल हरदम प्यासा है
हम आज मिले या कल मिले पल पल मिलना प्रत्याशा है
तुमसे सुन्दर तुमसे प्यारा विधि ने तो कोई रचा नहीं
गर हो इस ज़मीं पर तो मेरी आँखों को जांचा नहीं
वो ज्योत जलाएं रखना तुम वो प्रेम निहित परिभाषा है
तुमसे दो बातें करने को .................

Thursday, May 28, 2009


मैंने आँखों में तुम्हारे प्यार का
काजल लगा रखा है
मुझे सिर्फ तुम ही तुम दिखती हो

मैंने लिपस्टिक की तरह
होठों पर तुम्हारा नाम
सुर्ख यादों के साथ लगा रखा है
यह सिर्फ तुम्हें पुकारते हैं

मैंने पैरों में तुम्हारे प्रेम की
पायल पहन रखी है
ये जब देखो तब
तुम्हारे घर के लिए
ठुनक उठते हैं

तुम हो ‍िक मुझे
छोड़कर चली गई हो
इंतजार के घर में
छोड़कर हमेशा के लिए।

By Jitendra Chouhan

गुड मोर्निंग .
आज अपने इस ब्लॉग पे मैं अपने एक दोस्त के बारे में कुछ लिखने जा रहा हु .....बहुत ही सीधी सधी सी कहानी है .जो तक़रीबन हर उस इन्सान के साथ बीतती की जो प्यार करता हँ! जो उम्र के उस पड़ाव में होता की जब उससे "उसके " सिवा कुछ दिखाई नहीं देता सुनाई नहीं देता .बस उस्सी का चेहरा दिन के चारो पहर आँखों में सपनो के साथ रहता है!नाम उसका अमित है ..मेरे साथ एक प्राइवेट इंस्टिट्यूट में पड़ता था..हम आज भी बहुत अच्चे दोस्त है.नाम उस लड़की का अन्तिमा है..प्राइवेट इंस्टिट्यूट में पड़ते हुए ही उनकी जान पहचान हुई फिर किस्मत ने उन्हें और करीब ला दिया..इंस्टिट्यूट के अन्नुअल फंक्शन में साथ में अन्करिंग की..और धीरे धीरे करीब आते गए....अन्तिमा को अमित के करीब रहना अमित से बाटें करना अच्चा लगता था..दिल दिल के साथ रहना चाहता था ....बस उस्सी से बाते करना चाहता था. हवाओ में उड़ना चाहता था अन्तिमा का दिल अमित के साथ ! क्लास्सेस बंक करके अमित के घूमना , घर जाते की अमित को फ़ोन करना चोरी चुपके अन्तिमा का जोर का सगल बन गया था ! लेकिन अन्तिमा अमित को फ़ोन क्यों करती थी ? क्या अन्तिमा अमित को चाहती थी या फिर अन्तिमा फिर एक दोस्त की तरह अमित को पसंद करती थी !कुछ तो था जो दोनों दिलो को एक तार से जोड़े हुए था !कोई तो रिश्ता पनपने वाला था या पनप चूका था ......घंटो अपने इंस्टिट्यूट के बहार खड़े होके अन्तिमा का इंतज़ार करना घर जाके अन्तिमा के फ़ोन का इंतज़ार करना..अमित की ज़िन्दगी थी ! दोनों एक दुसरे के लिए साँसे लेने लगे थे ...एक दुसरे क लिए जीने लगे थे ...बहुत मानाने के बाद अन्तिमा ने कबूल कर ही लिया की अन्तिमा अमित से बेंतहा प्यार करती है.!अन्तिमा से घर वालो से चुप के एक टाटा इंडिकॉम का मोबाइल भी लेलिया ताकि अमित से हमेशा बात कर सके अपने दिल की धड़कने सुना सके उससे बता सके की अन्तिमा अमित से कितना प्यार करती है !दोनों रात रात भर बातें करने लगे...प्यार परवान चड़ने लगा....दोनों के घर में पता लग गया...पर प्यार किसी के रोके रुकता है क्या ? नहीं वो नहीं रुकता अमित अजमेर चोर के दुसरे शहर में चला गया क्योंकि उससे घर वालो ने वो शहर चोर दिया था .....अमित कुछ दिनों के लिए अजमेर में ही रह गया ...क्योंकि कुछ पडी अमित को अजमेर में रह के पूरी करनी थी!इस बिच अमित और अन्तिमा के जिस्म भी एक दुसरे को अपना चुके थे.....उनके जिस्म का रोम रोम कह रहा था की हम एक दुसरे के है...! अमित वो शहर चोर के अपने घर वालो क पास रहने चला गया ...! पर बीच बीच में वो अजमेर आता था घर वालो को झूट बोलके अन्तिमा से मिलने !जहा जिस्म से दिल और दिल से जिस्म की दूरियां तय की गई,! वह एक दुसरे को अपना बनाया गया ......प्यार को किसी की नज़र न लगे ये कसम भी खाई गई....





लेकिन इशक और मुश्क छुपाये नहीं छुपते चाहे लाख चुउपैये.
दोनों नज़र घर वालो को पता लगा को बंधिशो नज़र दौर शुरू हुए...आंसुओ में रात दिन घडिया काटने लगी.... प्यार रुकने वाला नहीं था .....चलता रहा ..चलता रहा

फिर अमित अपनी नौकरी करने अजमेर आ गया .!अमित अजमेर में नौकरी करना चाहता था सिर्फ अन्तिमा के लिए !ये अन्तिमा भी जानती थी .........पर प्यार को किसी की नज़र तो लगनी ही थी... और इस बार नज़र लगी अन्तिमा और अमित की .....!!!!
पर ये झगडा ज्यादा नहीं चला प्यार के आगे किसी की नहीं चली !पर अमित की किस्मत ज्यादा अच्छी नहीं थी..!अन्तिमा के घर वाले अन्तिमा की शादी करना चाहते थे पर अन्तिमा अमित से अन्तिमा के घर वाले अमित को पसंद नहीं करते थे....कारन अमित भी नहीं जनता था .! अपने घर वालो के दबाव में आके अमित ने अन्तिमा को रुलाया ..उससे छोड़ दिया पर वो ज्यादा दिनों तक नकली बन के नहीं रह पाया ......पर अन्तिमा के दिल में ये बात घर कर गई की अमित उससे कभी भी अकेला छोड़ देगा .....पर दोनों का प्यार सच्चा था .....क्या करे प्यार करने वाले हमेशा अकेले होता है !! अमित जॉब के लिए अजमेर से दुसरे शहर चला गे......कहते है जो नज़रो से दूर हो जाता है वो दिल से भी दूर हो जाता है .........अन्तिमा प्यार ज़रूर करती थी पर अब वो गर्माहट नहीं थी शायद ..खेर अमित तो चाहता था न............








एक दिन वो आया जब क़यामत आई ........अन्तिमा के घर वालो ने अन्तिमा की शादी कही और तय कर दी अब अन्तिमा हार मन चुक थी ...अमित से दूर जा चुकी थी,,,,,१ साल बाद भी अन्तिमा अमित से बात नहीं करना चाहती पर अमित आज भी अन्तिमा से बहुत प्यार करना चाहता था अब अमित को क्या करना चाहिए


उससे भूल नहीं सकता उसके बिना जी भी नहीं सकता .......क्या करे अमित
आज अन्तिमा अमित को पहचानने से भी इनकार करती है ....

Wednesday, May 27, 2009

TUM BHARAT KE VEER HO....











आप इन फोटोस को देख के क्या सोचते है की हमारा देख कहा जा रहा है ..?? हम भारत के युवा है हमे इस दिशा में क्या कोई कदम उठाना चाहिए या नेताओ की तरह ही हर घटना होने बाद जांच क आदेश देना चाहिए !क्या हमे ये सोच के मुह मोड़ लेना चाहिए या बेफिर्क होके बैठाना चाहिए की इसमें मैं क्या कर सकता हु? नहीं इस बार नहीं इस बार चुप नहीं बैठेंगे ....क्या हम आज भी किसी के गुलाम है .....शायद हां हम आज भी गुलाम है अपनी मजबूरियों के लेकिन मजबूरियों से बन्ध के नहीं जी सकते .....उठो तुम भारत के वीर को....
मुंबई ब्लास्ट के और फोटोस देखने के लिए इस पर क्लिक करेhttp://www.boston.com/bigpicture/2008/11/mumbai_under_attack.html

Dear All........if ur on my blog......i want some special cmmnts by U

Thanks

Nikhil